ख़ास ख़बर | 11.10.2008
पाकिस्तानी सुरक्षा सलाहकार भारत में
पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अवकाशप्राप्त मेजर जनरल महमूद अली दुर्रानी के भारत दौरे पर आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी.
पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अवकाशप्राप्त मेजर जनरल महमूद अली दुर्रानी आज शाम चार दिन की भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे हैं। यहाँ उनकी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन के साथ विस्तृत बातचीत होगी। नारायणन के अलावा वह विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह से भी मुलाकात करेंगे।
Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: प्धानमंत्री के साथ एमके नारायणन
यह पहला मौका है जब पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अकेले भारतीय अधिकारियों से वार्ता के लिए यहाँ आए हैं। हालांकि नई दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले मेजर जनरल दुर्रानी ने पाकिस्तान में एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में यह कहा था कि भारतीय पक्ष के साथ वार्ता के लिए उनके पास कोई निर्धारित एजेंडा नहीं है और वह खुले दिमाग के साथ भारत जा रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि नारायणन के साथ उनकी बातचीत मुख्यतः आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर तथा सुरक्षा से जुड़े अन्य मुद्दों पर केंद्रित रहेगी।
दुर्रानी उन गिने-चुने अधिकारीयों में से हैं जो पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ द्वारा नियुक्त किए जाने के बावजूद चुनाव के बाद गठित लोकतांत्रिक सरकार द्वारा हटाये नहीं गए हैं। वह अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं और भारत एवं पाकिस्तान के बीच बरसों तक चली ट्रैक-2 कूटनीति की प्रक्रिया में भी शिरकत कर चुके हैं।
दुर्रानी ने कहा है कि उनकी भारत यात्रा का लक्ष्य न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी के बीच हुई बातचीत को आगे बढ़ाना हैं।
ज़रदारी अपने निर्वाचन से पहले ही एक टीवी इंटरव्यू में कह चुके हैं कि दोनों देशों को प्यार-मुहब्बत के साथ इंसानों की तरह एक दूसरे से पेश आना चाहिए। उन्होंने इस बात का भी संकेत दिया है कि पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री अपने देश के प्रमुख राजनीतिक नेताओं के साथ भारत की यात्रा पर आएँगे। इन बयानों से भारत-पाकिस्तान शान्ति-प्रक्रिया के जारी रहने की आशा बंधती है।
लेकिन इसके साथ ही यह भी सच है कि दोनों देशों के बीच गठित आतंकवाद-निरोधक प्रणाली विफल सिद्ध हुई है और आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष में भारत और पाकिस्तान के बीच कोई खास सहयोग देखने में नहीं आया है। दुर्रानी की भारतीय अधिकारियों के साथ वार्ता के दौरान अफगानिस्तान की स्थिति और तालिबान के साथ समझौते के प्रयासों की भी चर्चा होगी।
कुलदीप कुमार, नई दिल्ली
















