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ख़ास ख़बर  | 10.10.2008

मार्टी अहतिसारी को नोबेल शांति पुरस्कार

फ़िनलैंड के पूर्व राष्ट्रपति मार्टी अहतिसारी को दुनिया भर में शांति प्रयासों और इसके लिए मध्यस्थता के लिए इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाएगा. अहतिसारी ने कोसोवो शांति प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई है.

कोसोवो, नामीबिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में शांति बहाली के लिए अहतिसारी का अहम योगदान समझा जाता है. नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा करते हुए नोबेल समिति ने कहा कि इस पुरस्कार के लिए 197 लोगों के नाम की चर्चा की गई और पिछले तीन दशकों में कई महाद्वीपों में अंतरराष्ट्रीय संघर्ष से निपटने नोबेल समितिBildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:  नोबेल समितिमें मार्टी अहतिसारी के महत्वपूर्ण प्रयासों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सम्मानित करने का फ़ैसला किया गया.

नोबेल समिति ने कहा, "उनके (अहतिसारी) इन प्रयासों से दुनिया में ज़्यादा शांति बहाली हो पाई है और अलफ़्रेड नोबेल की भावनाओं के तहत राष्ट्रों में ज़्यादा भाइचारा बढ़ा है."

अहतिसारी 1994 से 2000 तक फ़िनलैंड के राष्ट्रपति थे. उन्होंने दुनिया भर में कई जगहों पर संघर्ष और अशांति समाप्त करने के लिए प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभाई है. उनका सबसे बड़ा योगदान कोसोवो में मध्यस्थता समझा जाता है, जब उन्होंने कोसोवो की स्वायत्तता के लिए एक रोडमैप तैयार किया था. हालांकि ख़ुद अहतिसारी नामीबिया में अपने काम को सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं. उन्होंने नामीबिया, इंडोनेशिया, इराक़ और कोसोवो में शांति बहाली के लिए प्रमुख भूमिका निभाई है.

पुरस्कार के एलान के बाद उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि उन्हें बेहद ख़ुशी हो रही है. उन्होंने नॉर्वे ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया के लिए किए गए प्रयासों से वह काफ़ी संतुष्ट हैं.

1989-90 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि के तौर पर नामीबिया की आज़ादी में बेहद अहम भूमिका निभाई. इंडोनेशिया में 2005 में उन्होंने इंडोनेशिया सरकार और आचेह प्रांत के विद्रोहियों के बीच सुलह कराने में मध्यस्थ का काम किया और वहां 30 साल से जारी लड़ाई ख़त्म हो पाई. नोबेल समिति ने कहा कि अहतिसारी और उनकी क्राइसिस मैनेजमेंट इनीशिएटिव संस्था ने इंडोनेशिया के इस जटिल मुद्दे को हल करने में सफलता पाई.

इसके अलावा 1999 और फिर 2005-07 में उन्होंने बालकन क्षेत्र के कोसोवो की बेहद जटिल और मुश्किल समस्या को हल करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई. संयुक्त राष्ट्र दूत के तौर पर उन्होंने कोसोवो संघर्ष के समाधान का रास्ता निकाला. ख़्याल रहे कि इसी साल 17 फ़रवरी को कोसोवो ने ख़ुद को सर्बिया से अलग होने का एलान किया था. कई देशों ने कोसोवो को स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर मान्यता दे दी है.

इंडोनेशिया के सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति सुसीलो बामबांग युधोयोनो को यह जानकर बेहद ख़ुशी हुई कि मार्टी अहतिसारी को इस साल का नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है.

 
 

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